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Sunday, September 21, 2014

Fwd: आत्म जागरण का पथ


---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga <mggarga@gmail.com>
Date: 2014-09-21 9:53 GMT+05:30
Subject: आत्म जागरण का पथ
To:









  • आत्म जागरण का पथ

    जीवन बडा विचित्र हे , कब क्या होगा कुछ कहा नहीं जा सकता ! भविष्य में क्या होगा
    पता नहीं हे ! काल का रूप इतना भयंकर हे सब निगल जाता हे , संभाला जा सकता हे तो केवल वर्तमान को संभाला जा सकता हे ! जो क्षण चल रहा हे वही तो वर्तमान हे ,इसी को ठीक करना होगा !अपना रासता स्वंय बनाना होगा ! जीवन में उन्नति कर सकते हें जो स्वंय अपने को उपदेश दे सकते हें !




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